
ट्रंप ने उन देशों पर निशाना साधा जो अमेरिका को 'लूट' रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुराने आरोप दोहराते हुए उन देशों के नाम लिए हैं, जो उनकी नजर में दशकों से बेशर्मी से अमेरिका को "लूट" रहे हैं। यूरोपीय संघ (EU) को उन्होंने अमेरिका का एक बड़ा "दुश्मन" करार दिया, यह दावा करते हुए कि पिछले 45 वर्षों में EU ने बेहद चतुराई से अमेरिका को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाया है।
राष्ट्रपति ने घोषणा की कि कनाडा और मैक्सिको से आयात होने वाले सामानों पर लगाए गए टैरिफ 2 अप्रैल तक निलंबित रहेंगे, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि ऐसी छूट बहुत कम दी जाएगी। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका के ट्रेड पार्टनर्स में उतने "अच्छे लोग" नहीं हैं, जितने वे चाहते थे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका का राष्ट्रीय कर्ज, जो अब 36 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, अमेरिका की "नरम और कमजोर" व्यापार नीति का परिणाम है। अब, ट्रंप इस पैसे को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, भले ही इसके लिए तथाकथित "मित्र" देशों के साथ संबंध बिगाड़ने पड़ें, जो उनकी नजर में दुश्मनों से भी बदतर साबित हुए हैं।
यूरोपीय संघ के साथ ही, चीन भी उन देशों की सूची में शामिल है, जिन पर ट्रंप ने अमेरिका का फायदा उठाने का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति अब खुलकर हिसाब-किताब करने के मूड में हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का असली कर्जदार कौन है।
इस बीच, भारत ने पहले ही ट्रंप को खुश करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है और अमेरिका से आयात होने वाले 55% सामानों पर टैरिफ घटा दिया है। पहले ये टैरिफ 5% से 30% के बीच थे।
अब सवाल यह है कि अमेरिका के कौन से "मित्र" भारत के रास्ते पर चलेंगे और कौन अमेरिका को "लूटते" रहेंगे।